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शारदीय नवरात्रि 2026: कलश स्थापना, शुभ मुहूर्त, दुर्गा पूजा एवं विजयदशमी

शारदीय नवरात्रि 2026 की तिथियां, कलश स्थापना, संधि पूजा, महाष्टमी, महानवमी, माता दुर्गा के नौ स्वरूप और विजयदशमी का धार्मिक महत्व जानें।

विजय कुमार पांडेय · 9 अक्टूबर 2026 · 10 मिनट पढ़ने का समय

शारदीय नवरात्रि 2026 कब से शुरू होगी?

शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ 11 अक्टूबर 2026, रविवार को आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से होगा। इस पावन पर्व में जगज्जननी माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा, आराधना और उपासना की जाती है।

सनातन धर्म में भगवती महिषासुरमर्दिनी की आराधना को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति के मार्ग से जोड़ा जाता है।

कलश स्थापना 2026: शुभ मुहूर्त

तिथि: 11 अक्टूबर 2026, रविवार

मूल लेखक द्वारा प्रस्तुत वाराणसी पंचांग विवरण में अभिजित मुहूर्त सुबह 10:52 बजे से दोपहर 1:08 बजे तक बताया गया है।

महत्वपूर्ण: यह समय मूल लेखक के विवरण पर आधारित है। प्रकाशित पंचांगों में अंतर संभव है। इसे अंतिम प्रमाणित मुहूर्त न मानें; अपने स्थानीय पंचांग से सत्यापन करें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का विशेष विचार करते हुए घटस्थापना का शुभ समय निर्धारित किया जाता है।

शारदीय दुर्गा पूजा 2026 का कार्यक्रम

तिथिप्रमुख अनुष्ठान
11 अक्टूबरकलश स्थापना, माँ शैलपुत्री पूजन
12 अक्टूबरमाँ ब्रह्मचारिणी पूजन
13 अक्टूबरमाँ चंद्रघंटा पूजन
14 अक्टूबरमाँ कूष्मांडा पूजन
15 अक्टूबरमाँ स्कंदमाता पूजन
16 अक्टूबरषष्ठी, बोधन, बिल्वाभिमंत्रण, अधिवास एवं कात्यायनी पूजन
17 अक्टूबरनवपत्रिका प्रवेश, महास्नान, प्राणप्रतिष्ठा एवं आवाहन
18 अक्टूबरमहाष्टमी से संबंधित पारंपरिक पूजा कार्यक्रम
19 अक्टूबरअष्टमी-नवमी संधि पूजा, महानवमी एवं कुमारी पूजन
20 अक्टूबरव्रत पारण, अपराजिता पूजन, विसर्जन एवं विजयदशमी

यह तालिका मूल लेखक के कार्यक्रम पर आधारित है। अष्टमी, नवमी और संधि पूजा की वास्तविक तिथि एवं समय स्थानीय पंचांग के अनुसार जाँचें।

संधि पूजा 2026 का धार्मिक महत्व

अष्टमी तिथि के अंतिम 24 मिनट और नवमी तिथि के प्रारंभिक 24 मिनट को संधि पूजा का विशेष समय माना जाता है। इस अवधि में भगवती चामुंडा की आराधना की जाती है।

मूल वाराणसी विवरण में 19 अक्टूबर को प्रातः 6:29 से 7:17 बजे तक संधि पूजा का समय बताया गया है। इस समय का स्थानीय पंचांग से स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक है।

माता दुर्गा का आगमन और विदाई

मूल लेखक द्वारा प्रस्तुत प्रतिपदा मत के अनुसार माता का आगमन हाथी पर तथा विदाई चरणायुध अर्थात मुर्गे पर बताई गई है। बांग्ला मत के अनुसार आगमन दोला पर और विदाई घोड़े पर मानी गई है।

धार्मिक परंपराओं में इन वाहनों को वर्षा, सामाजिक परिस्थितियों तथा परिवर्तन के सांकेतिक फलादेश से जोड़ा जाता है। ये आस्था-आधारित व्याख्याएँ हैं, निश्चित वैज्ञानिक भविष्यवाणियाँ नहीं।

कलश स्थापना की सामान्य पूजा विधि

  1. प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. पूजा स्थान को पवित्र करके आसन स्थापित करें।
  3. मिट्टी के पात्र में जौ बोएँ।
  4. कलश में जल, सुपारी, सिक्का और पूजा सामग्री रखें।
  5. आम के पत्ते एवं नारियल से कलश सजाएँ।
  6. गणेश पूजन, संकल्प और देवी आवाहन करें।
  7. माँ दुर्गा को पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
  8. दुर्गा सप्तशती पाठ अथवा अपनी परंपरा के अनुसार मंत्रजप और आरती करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवरात्रि 2026 कब शुरू होगी?

11 अक्टूबर 2026, रविवार से।

कलश स्थापना कब होगी?

11 अक्टूबर 2026 को स्थानीय पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त में।

दशहरा 2026 कब है?

20 अक्टूबर 2026, मंगलवार को।

क्या हर शहर में कलश स्थापना का मुहूर्त एक समान है?

नहीं। स्थानीय सूर्योदय और पंचांग गणना के कारण समय में अंतर संभव है।

निष्कर्ष

शारदीय नवरात्रि शक्ति, श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक जागरण का महापर्व है। माँ महिषासुरमर्दिनी की आराधना भक्तों को धर्म, साहस, संयम और करुणा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

जय माता दी। जय माँ महिषासुरमर्दिनी।

ज्योतिर्विद विजय कुमार पांडेय
लेखक एवं शास्त्रीय संदर्भ

विजय कुमार पांडेय

ज्योतिर्विद, वास्तुविद एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ

संपर्क: 8986739089, 9471544388

मूल धार्मिक विवरण वाराणसी के पंचांग और पारंपरिक धर्मशास्त्रीय अध्ययन पर आधारित है।

संपादकीय सूचना

मुहूर्त और पूजा तिथियों का अंतिम निर्धारण स्थानीय पंचांग के अनुसार करें। लेख का उद्देश्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक जानकारी प्रदान करना है।

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